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हाई टेक होता जा रहा रेलवे! ट्रेनों के बाद अब स्टेशनों की छतों पर लगे सोलर पैनल, करोड़ों रुपये की होगी बचत

 Reported By: Anamika Gaur Written By: Shivendra Singh
 Published : Jul 30, 2026 03:25 pm IST,  Updated : Jul 30, 2026 03:36 pm IST

भारतीय रेलवे अब सिर्फ तेज और आधुनिक ट्रेनों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़े कदम उठा रहा है। रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में सोलर तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ाया जा रहा है।

रेलवे स्टेशनों पर...- India TV Hindi
रेलवे स्टेशनों पर सोलर पैनल लगाने का अभियान Image Source : INDIAN RAILWAYS

भारतीय रेलवे लगातार हाई-टेक और पर्यावरण के अनुकूल बनने की दिशा में बड़े कदम उठा रहा है। हाईस्पीड ट्रेनों और आधुनिक स्टेशनों के बाद अब रेलवे ने स्वच्छ ऊर्जा पर भी बड़ा दांव लगाया है। उत्तरी रेलवे ने रेलवे स्टेशनों और सेवा भवनों की छतों पर बड़े पैमाने पर सोलर पैनल लगाकर बिजली उत्पादन शुरू कर दिया है। इससे न केवल बिजली का खर्च कम होगा, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी आएगी। रेलवे का यह कदम देश के नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य को हासिल करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

उत्तरी रेलवे ने वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों यानी अप्रैल और मई 2026 के दौरान 2.2 मेगावाट क्षमता के ग्रिड से जुड़े रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित किए हैं। इन नए प्लांट्स के शुरू होने के बाद उत्तरी रेलवे की कुल सौर ऊर्जा क्षमता बढ़कर 28.35 मेगावाट हो गई है। इससे रेलवे को भविष्य में पारंपरिक बिजली पर कम निर्भर रहना पड़ेगा।

करोड़ों रुपये की बचत और प्रदूषण में कमी

रेलवे के अनुसार, अप्रैल और मई के दौरान इन सोलर प्लांट्स से करीब 34 लाख यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन हुआ। इससे रेलवे को लगभग 2.2 करोड़ रुपये की बिजली लागत बचाने में मदद मिली है। इसके साथ ही इस स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग से करीब 2,820 टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) के उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। यानी रेलवे की यह पहल पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक बचत, दोनों के लिहाज से बेहद अहम साबित हो रही है।

अब ट्रेन के कोच भी बन रहे सोलर स्मार्ट

रेलवे सिर्फ स्टेशनों तक ही सीमित नहीं है। हाल ही में प्रयागराज मंडल ने एक खास सोलर पावर्ड कोच भी लॉन्च किया है। इस कोच की छत पर 21 सोलर पैनल लगाए गए हैं, जिनकी कुल क्षमता 6.93 किलोवाट है। इन पैनलों से हर साल लगभग 13,400 यूनिट बिजली तैयार होगी, जिसका इस्तेमाल कोच के पंखे, लाइट और अन्य इलेक्ट्रिक उपकरणों को चलाने में किया जाएगा।

हर साल लाखों की बचत होगी

रेलवे का दावा है कि एक सोलर कोच से हर साल करीब 2.80 लाख रुपये की बिजली लागत बचाई जा सकेगी। इतना ही नहीं, यह तकनीक हर वर्ष लगभग 11 टन कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी मदद करेगी।

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